इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शनकक्षा 12 भौतिक विज्ञान नोट्स

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन · कक्षा 12 भौतिक विज्ञान · 8 टॉपिक.

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इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन में शामिल टॉपिक

  1. 1.विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का परिचय

    संक्षिप्त उत्तर

    विद्युतचुंबकीय प्रेरण एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ मैग्नेटिक फील्ड में परिवर्तन से कंडक्टर में एक इलेक्ट्रिक करंट का उत्पादन होता है। यह जनरेटर और ट्रांसफॉर्मर में इस्तेमाल होता है, जो हमारे घरों और गैजेट्स को ऊर्जा प्रदान करता है।

    विस्तृत उत्तर

    विद्युतचुंबकीय प्रेरण भौतिकी का एक मौलिक सिद्धांत है जिसे माइकल फैराडे ने खोजा था। यह तब होता है जब एक कंडक्टर मैग्नेटिक फील्ड के माध्यम से गति करता है या जब किसी कंडक्टर के आसपास मैग्नेटिक फील्ड में परिवर्तन होता है। इस मैग्नेटिक फील्ड में परिवर्तन से कंडक्टर में एक विद्युत प्रेरक बल (EMF) और तदनुसार, एक इलेक्ट्रिक करंट उत्पन्न होता है। मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:

    1. फैराडे का विद्युतचुंबकीय प्रेरण का नियम: यह कहता है कि किसी भी बंद सर्किट में उत्पन्न विद्युत प्रेरक बल उस सर्किट के माध्यम से मैग्नेटिक फ्लक्स के समय दर के परिवर्तन के नकारात्मक के बराबर होता है।


    2. उपयोग:

      • जनरेटर्स: मैकेनिकल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए विद्युतचुंबकीय प्रेरण का उपयोग करते हैं।
      • ट्रांसफॉर्मर्स: वैकल्पिक धारा (AC) विद्युत का वोल्टेज बदलते हैं, इसे विभिन्न उपयोगों के लिए ऊपर या नीचे करते हैं।
      • इलेक्ट्रिक मोटर्स: मैकेनिकल ऊर्जा में विद्युत ऊर्जा को परिवर्तित करने के लिए प्रेरण का उपयोग करते हैं।

    3. वास्तविक जीवन के उदाहरण:

      • वायरलेस चार्जर का उपयोग करके स्मार्टफोन चार्ज करना।
      • जलविद्युत संयंत्रों में बिजली उत्पादन।
      • अस्पतालों में MRI मशीन का काम करना।

    4. करियर और उद्योग:

      • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स का डिजाइन और विकास करना।
      • नवीकरणीय ऊर्जा: पवन टर्बाइन और सोलर पैनल्स के साथ काम करना।
      • स्वास्थ्य सेवा: मेडिकल इमेजिंग उपकरणों का विकास करना।

    विद्युतचुंबकीय प्रेरण को समझने के लिए एक गतिविधि:

    एक कॉइल के माध्यम से एक चुंबक को आगे-पीछे ले जाने का प्रयास करें, जो एक लाइट बल्ब से जुड़ी होती है। जब चुंबक गति में होता है, तो आप देखेंगे कि बल्ब प्रेरित करंट के कारण जल उठता है!

  2. 2.फैराडे और हेनरी के प्रयोग

    संक्षिप्त उत्तर

    प्रयोग 1 में यह दिखाया गया है कि जब किसी कुंडली के पास या उससे दूर चुंबक को हिलाया जाता है, तो उसमें विद्युत प्रवाहित होती है। प्रयोग 2 में दिखाया गया है कि एक कुंडली में दूसरी नजदीकी विद्युत धारा वाली कुंडली की गति के कारण धारा प्रेरित होती है। प्रयोग 3 एक सेटअप है जो दिखाता है कि किसी कुंडली और चुंबकीय क्षेत्र के बीच सापेक्ष गति से धारा प्रेरित होती है।

    विस्तृत उत्तर

    आइए प्रदान किए गए प्रयोगों पर विस्तार से विचार करें, जो विद्युतचुंबकीय प्रेरण के क्लासिक प्रदर्शन हैं:

    प्रयोग 1: चुंबक और कुंडली की गति

    • सेटअप: एक कुंडली C1 को एक गैल्वेनोमीटर G से जोड़ा गया है। एक बार चुंबक को कुंडली के पास और उससे दूर ले जाया जाता है।
    • अवलोकन: जैसे ही चुंबक कुंडली के पास आता है या उससे दूर जाता है, गैल्वेनोमीटर की सुई झुकती है, जिससे धारा के प्रवाह का संकेत मिलता है।
    • सिद्धांत प्रदर्शित: यह फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम का सीधा प्रदर्शन है। चुंबक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति से कुंडली के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन होता है, जिससे विद्युत प्रेरक बल (EMF) पैदा होता है, और परिणामस्वरूप, कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
      • क्रमशः प्रक्रिया:
        1. बार चुंबक को कुंडली की ओर ले जाया जाता है।
        2. कुंडली को काटने वाली चुंबकीय रेखाएँ बदलती हैं।
        3. कुंडली के माध्यम से बदलती चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फ्लक्स) एक EMF उत्पन्न करती है।
        4. यह EMF कुंडली में धारा उत्पन्न करती है, जिसे गैल्वेनोमीटर द्वारा पता लगाया जाता है।

      प्रयोग 2: नजदीकी कुंडली में बदलती धारा से प्रेरण

      • सेटअप: दो कुंडलियाँ, C1 और C2, एक-दूसरे के करीब रखी गई हैं। कुंडली C2 को एक स्विच के माध्यम से बैटरी से जोड़ा गया है, और कुंडली C1 को एक गैल्वेनोमीटर से जोड़ा गया है।
      • अवलोकन: जब कुंडली C2 के साथ सर्किट में स्विच बंद होता है, धारा पैदा होती है, तो कुंडली C1 के साथ सर्किट में गैल्वेनोमीटर क्षणिक रूप से झुकता है।
      • सिद्धांत प्रदर्शित: यह प्रयोग दिखाता है कि कैसे एक कुंडली (C1) में दूसरी कुंडली (C2) में धारा में परिवर्तन के कारण विद्युत धारा प्रेरित होती है। यह इस तथ्य के कारण है कि C2 में बदलती धारा एक बदलती चुंबकीय क्षेत्र बनाती है, जो उसके आसपास के स्थान में फैलती है, जिसमें C1 स्थित है, इस प्रकार C1 में धारा प्रेरित होती है।
      • प्रयोग 3: कुंडली और सर्किट के बीच सापेक्ष गति से प्रेरण

        • सेटअप: एक कुंडली C1 को गैल्वेनोमीटर से जोड़ा गया है, और एक स्विच K को एक अलग सर्किट में कुंडली C2 के साथ शामिल किया गया है।
        • अवलोकन: जब स्विच K को ऑन ऑफ किया जाता है, जिससे कुंडली C2 में धारा बदलती है, तो कुंडली C1 में प्रेरित धारा देखी जाती है।
        • प्रदर्शित सिद्धांत: यहाँ का सिद्धांत प्रयोग 2 के समान है, लेकिन यह सेटअप स्थिर कुंडली पर चलती चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव और स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली की गति का प्रभाव दोनों को प्रदर्शित कर सकता है।

        वास्तविक जीवन में उपयोग:

        • जेनरेटर्स: मैकेनिकल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं, प्रयोग 1 से प्राप्त सिद्धांतों का उपयोग करके।
        • ट्रांसफॉर्मर्स: प्रयोग 2 से प्राप्त सिद्धांतों का उपयोग करके दो सर्किटों के बीच ऊर्जा को स्थानांतरित करना।
        • इलेक्ट्रिक वाहन: प्रयोगों में देखे गए सिद्धांतों के समान तार रहित चार्जिंग के लिए प्रेरण का उपयोग करते हैं।

        घर पर करने के लिए गतिविधि: आप घरेलू सामान का उपयोग करके प्रयोग 1 का एक साधारण संस्करण बना सकते हैं:

        1. 1. कुछ तार को कार्डबोर्ड ट्यूब के चारों ओर लपेटें ताकि एक कुंडली बन जाए।
        2. 2. कुंडली के सिरों को एक छोटे बल्ब या LED से जोड़ें।
        3. 3. एक मजबूत चुंबक को कुंडली के अंदर और बाहर ले जाएँ और देखें कि जैसे-जैसे आप विद्युत उत्पन्न करते हैं, बल्ब रोशन होता है।

          करियर और उद्योग:

          • इंजीनियरिंग: विद्युत मशीनों और शक्ति प्रणालियों का डिजाइनिंग।
          • ऊर्जा: नवीकरणीय संसाधनों और शक्ति उत्पादन में काम करना।
          • ऑटोमोटिव: इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों का विकास, जिनमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होते हैं, जो ब्रेकिंग के समय विद्युत उत्पन्न करने के समान सिद्धांतों का उपयोग करते हैं।

          इन प्रयोगों का विस्तृत अन्वेषण दिखाता है कि विद्युतचुंबकीय प्रेरण के मूल सिद्धांत विभिन्न अनुप्रयोगों में कैसे प्रकट होते हैं, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर बड़े पैमाने की शक्ति उत्पादन और कटिंग-एज तकनीक तक।

  3. 3.चुंबकीय प्रवाह

    संक्षिप्त उत्तर

    चुंबकीय प्रवाह उस कुल चुंबकीय क्षेत्र को दर्शाता है जो किसी दिए गए क्षेत्रफल से होकर गुजरता है। इसे वेबर (Wb) में मापा जाता है और यह चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति का माप है जो क्षेत्रफल से गुजरती है।

    विस्तृत उत्तर

    चुंबकीय प्रवाह, जिसे ग्रीक अक्षर फाई (Φ) से दर्शाया जाता है, विद्युतचुंबकत्व में एक प्रमुख संकल्पना है। यह उन चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं (जिन्हें प्रवाह रेखाएं भी कहा जाता है) की संख्या को मापता है जो किसी विशिष्ट क्षेत्रफल से गुजरती हैं। यहाँ एक और विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया है:

    • परिभाषा: किसी सतह के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह उस सतह के माध्यम से गुजरने वाले चुंबकीय क्षेत्र के सामान्य (पर्पेंडिकुलर) घटक का सतही समाकलन होता है।

    • गणितीय अभिव्यक्ति: Φ = B · A · cos(θ), जहां:

      • Φ चुंबकीय प्रवाह है।
      • B चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता है।
      • A वह क्षेत्रफल है जिसके माध्यम से क्षेत्र रेखाएं गुजरती हैं।
      • θ क्षेत्र रेखाओं और सतह A के सामान्य के बीच का कोण है।
    • इकाइयां: चुंबकीय प्रवाह की एसआई इकाई वेबर (Wb) है। एक वेबर एक टेस्ला मीटर वर्ग के बराबर होता है (1 Wb = 1 T·m²)।

    • अनुप्रयोग: चुंबकीय प्रवाह विद्युतचुंबकीय प्रेरण के फैराडे के नियम में महत्वपूर्ण है, जहां समय के साथ प्रवाह में परिवर्तन से एक विद्युत प्रेरक बल (EMF) उत्पन्न होता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर्स, जेनरेटर्स, इंडक्टर्स और ट्रांसफॉर्मर्स को डिजाइन करने में किया जाता है।

      • वास्तविक जीवन के उदाहरण:

        • मेटल डिटेक्टर का काम चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन पर आधारित होता है।
        • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) शरीर की छवियाँ उत्पन्न करने के लिए चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन का उपयोग करता है।
      • चुंबकीय प्रवाह को समझने के लिए गतिविधि: आप एक चुंबक के ऊपर एक कागज़ रखकर उस पर लोहे की बारीक कीलें छिड़ककर चुंबकीय प्रवाह का प्रदर्शन कर सकते हैं। कीलों द्वारा बनाई गई पैटर्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं और कागज़ के माध्यम से प्रवाह को दर्शाती है।

  4. 4.फैराडे के प्रेरण नियम

    संक्षिप्त उत्तर:

    फैराडे के प्रेरण नियम के अनुसार, किसी परिपथ में उत्पन्न वोल्टेज मैग्नेटिक फ्लक्स के परिवर्तन की दर के सीधे आनुपातिक होता है। सूत्र है =−ΔΦΔEMF=−NΔtΔΦ​, जहाँ EMF उत्पन्न वोल्टेज है, N कुंडली में चक्रों की संख्या है, ΔΦΔΦ मैग्नेटिक फ्लक्स में परिवर्तन है, और ΔΔt फ्लक्स को बदलने में लगने वाला समय है।
    विस्तृत उत्तर:

    फैराडे के प्रेरण नियम की व्याख्या:

    फैराडे का विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम एक मौलिक सिद्धांत है जो भविष्यवाणी करता है कि कैसे एक चुंबकीय क्षेत्र एक विद्युत परिपथ के साथ इंटरैक्ट करेगा ताकि एक विद्युतचालक बल (EMF) उत्पन्न हो—एक घटना जिसे विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहा जाता है। यह विद्युत और चुंबकत्व को जोड़ने वाला एक बुनियादी नियम है।

    गणितीय अभिव्यक्ति:

    फैराडे के प्रेरण नियम के लिए गणितीय सूत्र इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

    =−ΔΦΔEMF=−NΔtΔΦ​

    जहाँ:

    • EMF विद्युतचालक बल है जो वोल्ट में होता है।
    • N कुंडली में चक्रों की संख्या है।
    • ΔΦΔΦ वेबर में मैग्नेटिक फ्लक्स में परिवर्तन है।
    • ΔΔt सेकंड में समय है जिसके दौरान फ्लक्स बदलता है।

    व्युत्पत्ति:

    1. मैग्नेटिक फ्लक्स (ΦΦ): एक लूप के माध्यम से मैग्नेटिक फ्लक्स को मैग्नेटिक क्षेत्र (B), लूप के क्षेत्रफल (A), और मैग्नेटिक क्षेत्र और लूप के सामान्य के बीच कोण (θ) के कोसाइन के उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है: Φ=⋅⋅cos⁡Φ=B⋅A⋅cos(θ)।

    2. मैग्नेटिक फ्लक्स में परिवर्तन: यदि मैग्नेटिक फ्लक्स बदलता है, चाहे वह मैग्नेटिक क्षेत्र की ताकत, लूप के क्षेत्रफल, या कोण बदलने से हो, तो समय ΔΔt के दौरान मैग्नेटिक फ्लक्स में एक परिवर्तन ΔΦΔΦ होता है।

    3. उत्पन्न EMF: फैराडे के नियम के अनुसार, समय के साथ मैग्नेटिक फ्लक्स में यह परिवर्तन लूप में एक विद्युतचालक बल (EMF) उत्पन्न करता है। समीकरण में नकारात्मक चिह्न दिशा को दर्शाता है कि उत्पन्न EMF मैग्नेटिक फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करता है, लेंज़ के नियम के अनुसार।

    वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग और करियर:

    फैराडे के नियम का उपयोग विद्युत जनरेटरों, ट्रांसफॉर्मरों, और प्रेरण मोटरों जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जाता है, जो विद्युत उद्योग के लिए मौलिक हैं। इस सिद्धांत को समझना विद्युत इंजीनियरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, और किसी भी क्षेत्र में जो विद्युतचुंबकीय प्रणालियों को शामिल करता है, में करियर के लिए महत्वपूर्ण है।

  5. 5.लेन्ज़ का नियम और ऊर्जा का संरक्षण

    संक्षिप्त उत्तर: लेंज़ का नियम कहता है कि मैग्नेटिक फ्लक्स में बदलाव से उत्पन्न धारा की दिशा ऐसी होती है कि यह बदलाव का विरोध करने वाले चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करती है। यह नियम ऊर्जा के संरक्षण को बनाए रखता है। आरेखों (a) और (b) में, लूप में उत्पन्न धारा की दिशा लूप के अंदर दिखाए गए तीरों द्वारा दिखाई गई है, जो चुंबक की गति का विरोध करने वाले चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करते हैं, जैसा कि लूप के आसपास बाहरी और अंदरूनी दिशा में मुड़े हुए तीरों द्वारा संकेत किया गया है।
    विस्तृत उत्तर:

    लेंज़ का नियम विस्तार से समझाया गया:

    1834 में हेनरिक फ्रेडरिक लेंज़ ने एक नियम बताया जो बदलते मैग्नेटिक क्षेत्र के कारण एक चालक में उत्पन्न धारा की दिशा का वर्णन करता है। लेंज़ का नियम ऊर्जा के संरक्षण का एक रूप है, जो कहता है कि प्रेरित विद्युतचालक बल (EMF) हमेशा एक ऐसी धारा उत्पन्न करता है जिसका चुंबकीय क्षेत्र मूल मैग्नेटिक फ्लक्स में बदलाव का विरोध करता है।

    आरेख के साथ विवरण:

    1. आरेख (a) में, जब एक चुंबक का उत्तर ध्रुव एक तार के लूप के पास आता है, तो बदलते मैग्नेटिक क्षेत्र से एक धारा उत्पन्न होती है।

    2. लेंज़ के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा ऐसी दिशा में बहेगी जो चुंबक के गति का विरोध करने वाले चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करेगी। इस स्थिति में, धारा विपरीत दिशा में बहती है, जिससे नजदीकी साइड पर एक उत्तर ध्रुव बनता है, जो आने वाले चुंबक के उत्तर ध्रुव को धकेलता है।

    3. आरेख (b) में, जब उत्तर ध्रुव को लूप से दूर ले जाया जाता है, तो प्रेरित धारा ऐसी दिशा में बहेगी जो लूप के अंदर चुंबकीय क्षेत्र को समान रखने का प्रयास करेगी। इसलिए, धारा घड़ी की दिशा में बहती है, जिससे नजदीकी साइड पर एक दक्षिण ध्रुव बनता है, जो दूर जा रहे चुंबक के उत्तर ध्रुव को आकर्षित करने की कोशिश करता है।

      वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग और करियर:

      लेंज़ का नियम ट्रांसफॉर्मर, इंडक्टर्स और विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक मोटर्स और जेनरेटर्स जैसे विद्युत प्रणालियों को डिजाइन करने में मौलिक है। यह सिद्धांत विद्युत इंजीनियरिंग, ऊर्जा उत्पादन और उन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है जो विद्युत उपकरणों के डिजाइन और निर्माण से संबंधित हैं।

  6. 6.मोशन इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स

    संक्षिप्त उत्तर: गतिज ईएमएफ तब उत्पन्न होता है जब सर्किट का एक हिस्सा चुंबकीय क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस गति से लूप के अंदर के क्षेत्रफल में परिवर्तन होता है, जिससे चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन होता है और बदले में ईएमएफ उत्पन्न होता है।

    विस्तारित उत्तर और व्युत्पन्न:

    1. संकल्पनात्मक सेटअप:

      • चलते हुए चालक PQ को देखें जो चुंबकीय क्षेत्र के अंदर है और लूप PQRS का हिस्सा है। चालक PQ वेग v के साथ बाएं तरफ गति करता है, जिससे आयताकार लूप का क्षेत्रफल कम होता है।
    2. चुंबकीय प्रवाह (ΦΦB​):

      • लूप के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह Φ=×ΦB​=B×A द्वारा दिया जाता है, जहाँ B चुंबकीय क्षेत्र की ताकत है और A लूप का क्षेत्रफल है।
    3. गति के साथ प्रवाह में परिवर्तन:

      • जैसे चालक गति करता है, क्षेत्रफल A बदलता है क्योंकि लूप का एक भाग गति कर रहा है। यदि लूप की लंबाई RS है l और लंबाई RQ है x, तो क्षेत्रफल =×A=l×x है।
    4. फैराडे का नियम ऑफ इंडक्शन:

      • फैराडे के नियम के अनुसार, उत्पन्न ईएमएफ (ϵ) चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन की दर के नकारात्मक के बराबर होता है, =−Φϵ=−dtdΦB​​।
    5. ईएमएफ का व्युत्पन्न:

      • ΦΦB​ के लिए प्रयुक्त अभिव्यक्ति को प्रतिसथापित करते हुए, हम प्राप्त करते हैं
      • =−(××)ϵ=−dtd(B×l×x)​.

        • क्योंकि B और l स्थिरांक हैं, व्युत्पन्न सरलीकृत हो जाता है =−××ϵ=−B×l×dtdx​.
        • x के समय के सापेक्ष परिवर्तन दर dtdx​ वेग v है, इसलिए =−××ϵ=−B×l×v.
        1. ईएमएफ की दिशा:
          • नकारात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि उत्पन्न ईएमएफ की दिशा ऐसी होगी जो लूप के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन का विरोध करती है, लेंज़ के नियम के अनुसार।

        संख्यात्मक उदाहरण: चलो गतिज ईएमएफ की गणना निम्नलिखित मानों के आधार पर करते हैं:

        • चुंबकीय क्षेत्र की ताकत, =0.3B=0.3 टेस्ला
        • लूप की लंबाई, =0.4l=0.4 मीटर
        • चालक का वेग, =5v=5 मीटर/सेकंड

        निकाले गए सूत्र =−××ϵ=−B×l×v का उपयोग करते हुए, हम हमारे मानों को लगाते हैं:

        =−0.3×0.4×5ϵ=−0.3×0.4×5 =−0.6 Vϵ=−0.6 V

        नकारात्मक चिन्ह ईएमएफ की दिशा को दर्शाता है, इसलिए गतिज ईएमएफ की परिमाण 0.6 वोल्ट है।

        वास्तविक जीवन में, यह घटना जनरेटर और मोटर्स के संचालन में उपयोग की जाती है। एक जनरेटर में, गति का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है, जबकि मोटर में, विद्युत का उपयोग गति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

  7. 7.प्रेरणशीलता

    संक्षिप्त उत्तर

    प्रेरणशीलता एक चालक का वह गुण होता है जिसके द्वारा चालक में धारा में परिवर्तन से चालक में ही (स्व-प्रेरणशीलता) और आस-पास के किसी भी चालक में (पारस्परिक प्रेरणशीलता) विद्युत चुम्बकीय बल (emf) उत्पन्न होता है।

    विस्तारित उत्तर

    प्रेरणशीलता विद्युतचुम्बकत्व की एक मौलिक अवधारणा है। प्रेरणशीलता के दो प्रकार होते हैं: स्व-प्रेरणशीलता और पारस्परिक प्रेरणशीलता।

    • स्व-प्रेरणशीलता: यह वह घटना है जिसमें एक कुंडली में धारा में परिवर्तन से एक बदलते हुए चुम्बकीय क्षेत्र का निर्माण होता है, जो बदले में उसी कुंडली में एक emf को प्रेरित करता है।

    • पारस्परिक प्रेरणशीलता: यह तब होता है जब एक कुंडली में धारा में परिवर्तन से एक नजदीकी कुंडली में एक emf को प्रेरित किया जाता है।

    आरेख का उपयोग करके व्युत्पत्ति:

    आपके द्वारा प्रदान किए गए आरेख में, हम दो कुंडलियों को देखते हैं जिन्हें 1S1​ और 2S2​ लेबल किया गया है, प्रत्येक में कई चक्र 1N1​ और 2N2​ के साथ। कुंडलियों की त्रिज्या 1r1​ और 2r2​ है, और वे ऐसे स्थित हैं कि 1S1​ द्वारा निर्मित चुम्बकीय क्षेत्र 2S2​ से गुजरता है।

    1. पारस्परिक प्रेरणशीलता व्युत्पत्ति:
      • जब एक धारा 1I1​ 1S1​ से गुजरती है, तो यह एक चुम्बकीय क्षेत्र का उत्पादन करती है।
        • एम्पियर के नियम के अनुसार, एक लंबे सीधे चालक से दूरी r पर चुम्बकीय क्षेत्र B का मान होता है =02B=2πrμ0​I​, जहाँ 0μ0​ मुक्त स्थान का पारगम्यता है।
        • 1
          N1​ चक्रों की एक कुंडली के लिए, कुंडली के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र होता है =01121B=μ0​2πr1​N1​I1​​।
        • यह चुम्बकीय क्षेत्र 2S2​ के साथ जुड़ता है और 2S2​ के साथ जुड़े हुए प्रवाह (फ्लक्स) (ΦΦ) Φ=⋅Φ=B⋅A होता है, जहाँ A 2S2​ का अनुप्रस्थ क्षेत्र है।
        • इसलिए, Φ=01121⋅22Φ=μ0​2πr1​N1​I1​​⋅πr22​ है।
        • पारस्परिक प्रेरणशीलता M को तब 2S2​ के माध्यम से चुम्बकीय प्रवाह के लिए 1S1​ में धारा के अनुपात से परिभाषित किया जाता है: =2Φ1M=I1​N2​Φ​।
        • Φ
          Φ के लिए प्रतिस्थापन करते हुए, हमें =0122221M=μ0​2πr1​N1​N2​πr22​​ मिलता है।
        1. स्व-प्रेरणशीलता व्युत्पत्ति:
          • अब 1S1​ कुंडली पर विचार करें। जब 1I1​ में धारा परिवर्तन होता है, तो कुंडली के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र बदलता है।
          • यह बदलते हुए चुम्बकीय क्षेत्र 1S1​ में ही एक emf को प्रेरित करता है, जो फैराडे के विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार होता है।
          • प्रेरित emf E चुम्बकीय प्रवाह ΦΦ के परिवर्तन दर और चक्रों की संख्या 1N1​ के अनुपातिक होती है:
          • =−1ΦE=−N1​dtdΦ​।

            • स्व-प्रेरणशीलता L को तब कुंडली के माध्यम से चुम्बकीय प्रवाह के लिए कुंडली में धारा के अनुपात से परिभाषित किया जाता है: =1Φ1L=I1​N1​Φ​।
            • ΦΦ के लिए प्रतिस्थापन करते हुए, हमें =0121221L=μ0​2πr1​N12​πr12​​ मिलता है।

            वास्तविक जीवन के उदाहरण और अनुप्रयोग: स्व-प्रेरणशीलता का उपयोग ट्रांसफॉर्मरों में किया जाता है जहां कुंडलियों का उपयोग वोल्टेज स्तरों को बढ़ाने या घटाने के लिए किया जाता है। पारस्परिक प्रेरणशीलता वायरलेस चार्जिंग के सिद्धांत पर आधारित है, जहां एक प्रसारक कुंडली में धारा में परिवर्तन आपके उपकरण में एक रिसीवर कुंडली में धारा को प्रेरित करता है।

            करियर और उद्योग:

            • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: विद्युत परिपथों और घटकों जैसे कि इंडक्टर्स और ट्रांसफॉर्मर्स का डिजाइन करना।
            • संचार उद्योग: रेडियो और वायरलेस प्रौद्योगिकी में घटकों का निर्माण करना।
            • ऑटोमोटिव उद्योग: इग्निशन सिस्टमों और RFID सिस्टमों के डिजाइन में।
  8. 8.AC जनरेटर

    संक्षिप्त उत्तर:

    एक AC जनरेटर एक उपकरण है जो मैकेनिकल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, इसके लिए यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन का उपयोग करता है। मैकेनिकल ऊर्जा, जो आमतौर पर एक घूर्णन गति से प्रदान की जाती है, एक चुंबकीय क्षेत्र के भीतर एक कंडक्टर को घुमाती है ताकि प्रत्यावर्ती धारा (AC) उत्पन्न हो सके।

    विस्तृत उत्तर:

    कार्य सिद्धांत: AC जनरेटर माइकल फराडे द्वारा खोजी गई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांत पर काम करता है। जब एक कुंडली चुंबकीय क्षेत्र के भीतर घूमती है, तो कुंडली के साथ चुंबकीय फ्लक्स लिंकेज बदलता है, जिससे एक विद्युत प्रेरित बल (emf) उत्पन्न होता है।

    घटक:

    • चुंबकीय क्षेत्र: स्थायी चुंबकों या इलेक्ट्रोमैग्नेट्स द्वारा बनाई गई, जिन्हें N (उत्तर) और S (दक्षिण) के रूप में लेबल किया गया है।
    • कुंडली: एक तार का लूप जो चुंबकीय क्षेत्र के भीतर घूमता है।
    • धुरी: कुंडली से जुड़ा हुआ, यह कुंडली को घुमाने में मदद करता है।
    • स्लिप रिंग्स: वे कुंडली के सिरों से जुड़े होते हैं और इसके साथ घूमते हैं, ब्रश के साथ एक निरंतर संबंध बनाए रखते हैं।
    • ब्रश: आमतौर पर कार्बन से बने होते हैं, वे स्थिर होते हैं और स्लिप रिंग्स से बाहरी सर्किट में धारा को स्थानांतरित करते हैं।
    • प्रत्यावर्ती EMF: विद्युत आउटपुट जो कुंडली के घूमने के साथ दिशा बदलता है।

    काम करने का तरीका:

    1. जैसे ही कुंडली घूमती है, चुंबकीय फ्लक्स लिंकेज बदलता है।
    2. फैराडे के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के नियम के अनुसार, चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन एक emf को प्रेरित करता है।
    3. प्रेरित emf की दिशा हर आधे घूर्णन के साथ बदलती है क्योंकि कुंडली के सापेक्ष चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बदलती है, जिससे AC पैदा होता है।
    4. गणितीय अभिव्यक्ति: प्रेरित emf (ε) को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: =−Φ
      ε=−NdtdΦ​ जहाँ:

      • ε प्रेरित emf है,
      • N कुंडली में मोड़ों की संख्या है,
      • ΦΦ चुंबकीय फ्लक्स है।

      व्युत्पत्ति: कुंडली के माध्यम से फ्लक्स ΦΦ को दिया जाता है: Φ=cos⁡Φ=BAcos(θ) जहाँ:

      • B चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति है,
      • A कुंडली का क्षेत्रफल है,
      • θ चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली के सामान्य के बीच का कोण है, =θ=ωt (जहाँ ω कोणीय वेग है और t समय है)।

      ΦΦ को t के संबंध में विभेदित करने पर, हमें प्रेरित emf मिलता है: =−(cos⁡)=sin⁡
      ε=−Ndtd(BAcos(ωt))​=NBAωsin(ωt)

      अनुप्रयोग: शक्ति उत्पादन: AC जनरेटरों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए बिजली संयंत्रों में किया जाता है। परिवहन: वे इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के लिए रेलगाड़ियों में उपयोग किए जाते हैं। उद्योग: वे कई औद्योगिक मशीनों के लिए पावर स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। वास्तविक जीवन का उदाहरण: हाथ से चलने वाले टॉर्च के बारे में सोचें। जब आप हैंडल घुमाते हैं, तो आप जनरेटर में धुरी की तरह काम कर रहे हैं, और यह मैक

      निकल क्रिया विद्युत उत्पन्न करती है जो प्रकाश को चालू करती है।

      करियर या उद्योग: AC जनरेटर के बारे में सीखना विद्युत इंजीनियरिंग, ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक मशीनरी, या विद्युत से संबंधित किसी भी क्षेत्र में करियर के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।

      यदि आप विद्युत इंजीनियरिंग, ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक मशीनरी या विद्युत के क्षेत्र में रुचि रखते हैं, तो AC जनरेटर के बारे में जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकती है।

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