चुंबकत्व और पदार्थकक्षा 12 भौतिक विज्ञान नोट्स

चुंबकत्व और पदार्थ · कक्षा 12 भौतिक विज्ञान · 5 टॉपिक.

ये नोट्स बिना खाते के मुफ़्त पढ़े जा सकते हैं। क्रम से पढ़ें, या परीक्षा से पहले चुनिंदा रिवीजन के लिए अध्याय सूची का उपयोग करें।

चुंबकत्व और पदार्थ में शामिल टॉपिक

  1. 1.चुंबकत्व और पदार्थ का परिचय

    संक्षिप्त उत्तर

    मैग्नेटिज़्म और मैटर चुंबकों के गुणों, चुंबकीय क्षेत्र, और विभिन्न सामग्रियों का चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, इसके बारे में जानकारी देता है। यह रोजमर्रा की तकनीकी जैसे कि कम्पास, मोटर्स, और डेटा स्टोरेज डिवाइसेज में इस्तेमाल होता है। विस्तृत उत्तर

    परिचय

    चुंबकत्व एक ऐसी शक्ति है जिसे चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति प्रतिक्रिया करने वाली सामग्रियों द्वारा अनुभव किया जाता है। इस भौतिक शाखा में चुंबकीय क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है, जो अदृश्य रेखाएँ होती हैं जो चुंबकीय बलों की दिशा को दर्शाती हैं।

    मुख्य अवधारणाएँ

    1. चुंबकीय क्षेत्र: यह एक चुंबक के चारों ओर होता है और वह क्षेत्र दर्शाता है जहां चुंबकीय बलों को देखा जा सकता है। यह चुंबक के ध्रुवों पर सबसे मजबूत होता है।
    2. चुंबकीय ध्रुव: हर चुंबक में दो ध्रुव होते हैं, उत्तर और दक्षिण। विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, और समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
    3. चुंबकीय सामग्री: ऐसी सामग्री जिन्हें चुंबकीय बनाया जा सकता है या जो चुंबक द्वारा आकर्षित की जा सकती हैं। उदाहरणों में लोहा, निकेल, और कोबाल्ट शामिल हैं।
    4. पृथ्वी की चुंबकत्व: पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह काम करती है जिसके चुंबकीय ध्रुव भौगोलिक ध्रुवों के पास होते हैं। इसलिए कम्पास उत्तर की ओर इशारा करते हैं।

    वास्तविक जीवन के उदाहरण

    • कम्पास पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके नेविगेट करने में मदद करते हैं जो मैग्नेटिक नॉर्थ पोल की ओर इशारा करता है।
    • इलेक्ट्रिक मोटर्स चुंबकत्व के सिद्धांत पर काम करते हैं जहाँ इलेक्ट्रिक करंट को कॉइल्स के माध्यम से गुजारने पर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होते हैं, जो मोटर को चलाते हैं।
    • डेटा स्टोरेज: हार्ड ड्राइव्स और क्रेडिट कार्ड्स डेटा स्टोर करने के लिए चुंबकीय सामग्री का उपयोग करते हैं।

    करियर और उद्योगों में अनुप्रयोग

    • इंजीनियरिंग: मोटर्स, जनरेटर्स, और चुंबकीय सेंसर्स का डिज़ाइन करना।
    • पर्यावरण विज्ञान: पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तनों का अध्ययन करके प्लेट टेक्टोनिक्स को समझना।
    • डेटा स्टोरेज टेक्नोलॉजी: हार्ड ड्राइव्स और मेमोरी कार्ड्स जैसे स्टोरेज डिवाइसों को बनाना और सुधारना।

    चुंबकत्व को समझने के लिए एक सरल गतिविधि

    इस सरल गतिविधि को आजमाएं: एक छोटा चुंबक और कुछ पेपर क्लिप्स लें। क्लिप्स को एक टेबल पर बिखेरें और धीरे-धीरे उन्हें चुंबक के पास लाएं। देखें कैसे क्लिप्स चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के अनुसार खुद को संरेखित करते हैं। यह दिखाता है कि चुंबकीय बल कैसे काम करते हैं।

  2. 2.बार चुंबक

    संक्षिप्त उत्तर

    एक बार चुंबक आमतौर पर लोहा, स्टील, या किसी भी चुंबकीय सामग्री का एक आयताकार टुकड़ा होता है, जो चुंबकीय गुण जैसे कि लोहे के टुकड़ों को आकर्षित करता है। एक बार चुंबक की चुंबकीय फील्ड लाइनें उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव पर मिलती हैं, जो चुंबक के आसपास के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दिखाती हैं। एक बार चुंबक को एक समान सोलेनॉइड (एक तार का कुंडल) के रूप में सोचा जा सकता है, जिसमें एक विद्युत प्रवाह होता है, जो एक समान चुंबकीय फील्ड बनाता है। जब एक चुंबकीय द्विध्रुव (जैसे कि एक बार चुंबक) को एक समान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो यह एक टॉर्क का अनुभव करता है जो इसे चुंबकीय क्षेत्र के साथ संरेखित करता है।

    विस्तृत उत्तर

    बार चुंबक और इसकी चुंबकीय फील्ड लाइनें:

    1. अवधारणा: एक बार चुंबक एक साधारण आयताकार वस्तु है जो अपने आसपास एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। इस क्षेत्र को चुंबकीय फील्ड लाइनों के माध्यम से दृश्यमान किया जा सकता है।

    2. चुंबकीय फील्ड लाइनें: ये लाइनें चुंबक के उत्तरी ध्रुव से शुरू होती हैं और इसके दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं, जबकि चुंबक के अंदर, वे दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर चलती हैं, बंद लूप बनाती हैं। ये लाइनें चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और ताकत को दर्शाने का एक तरीका हैं। लाइनें जितनी अधिक निकट होती हैं, चुंबकीय क्षेत्र उतना ही मजबूत होता है।

    गतिविधि: एक कंपास और एक बार चुंबक का उपयोग करें। कंपास को चुंबक के पास रखें और देखें कि कंपास की सुई चुंबक की चुंबकीय फील्ड लाइनों के साथ कैसे संरेखित होती है। कंपास को चुंबक के चारों ओर ले जाएं और देखें कि चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कैसे बदलती है।

    वास्तविक जीवन का उदाहरण: पृथ्वी स्वयं एक विशाल बार चुंबक की तरह कार्य करती है जिसके चुंबकीय ध्रुव इसके भौगोलिक ध्रुवों के निकट स्थित होते हैं। इसीलिए कंपास उत्तर-दक्षिण दिशा में इंगित करते हैं।

    एक बिंदु पर बार चुंबक के कारण चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र: एक बार चुंबक के अक्षीय रेखा पर एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र =0423B=4πμ0​​r32m​ द्वारा दिया जाता है, जहाँ B चुंबकीय क्षेत्र है, 0μ0​ मुक्त स्थान की पारगम्यता है, m बार चुंबक का चुंबकीय क्षण है, और r चुंबक के केंद्र से बिंदु तक की दूरी है।

    बार चुंबक के रूप में एक समान सोलेनॉइड:

    1. अवधारणा: एक सोलेनॉइड एक तार का कुंडल होता है जो विद्युत प्रवाह के माध्यम से जाने पर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। एक बार चुंबक को एक सोलेनॉइड के समान माना जा सकता है जिसमें एक विद्युत प्रवाह होता है।

    2. व्युत्पत्ति: एक लंबे सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र =0B=μ0​nI द्वारा दिया जाता है, जहाँ n प्रति यूनिट लंबाई पर चक्रों की संख्या है, और I प्रवाह है। प्रवाह और चक्रों की संख्या को समायोजित करके, एक सोलेनॉइड को एक बार चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र की नकल करने के लिए बनाया जा सकता है।

    वास्तविक जीवन में उपयोग: यह अवधारणा इलेक्ट्रोमैग्नेट्स और मोटरों में उपयोग की जाती है जहाँ चुंबकीय क्षेत्र को नियंत्रित करना आवश्यक होता है।

    एक समान चुंबकीय क्षेत्र में द्विध्रुव:

    1. अवधारणा: एक चुंबकीय द्विध्रुव, जैसे कि एक छोटा बार चुंबक, जब एक समान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो एक टॉर्क का अनुभव करता है जो इसे क्षेत्र के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है।

    2. सूत्र और व्युत्पत्ति: द्विध्रुव द्वारा अनुभव किया गया टॉर्क (τ) =sin⁡τ=mBsinθ द्वारा दिया जाता है, जहाँ m द्विध्रुव का चुंबकीय क्षण है, B चुंबकीय क्षेत्र की ताकत है, और θ चुंबकीय क्षण और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है। यह सूत्र उस सिद्धांत से व्युत्पन्न होता है कि एक चुंबकीय क्षेत्र में एक चुंबकीय द्विध्रुव की संभावित ऊर्जा =−cos⁡U=−mBcosθ होती है, और टॉर्क इस संभावित ऊर्जा की θ के संबंध में परिवर्तन दर होती है।

    वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग: यह सिद्धांत मैग्नेटिक कंपासों और विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों में उपयोग किया जाता है जो चुंबकीय क्षेत्रों की ताकत को मापने के लिए होते हैं।

  3. 3.चुंबकत्व और गॉस का नियम

    संक्षिप्त उत्तर

    यह आरेख एक छोटे क्षेत्रफल (ΔΔS) को दर्शाता है जिसके माध्यम से चुंबकीय क्षेत्र (B) गुजरता है। कोण θ वह कोण है जो क्षेत्रफल के सामान्य (^n^) और चुंबकीय क्षेत्र के बीच है। चुंबकत्व के लिए गौस का नियम बताता है कि बंद सतह के माध्यम से कुल चुंबकीय प्रवाह शून्य होता है, जिसका अरथ है कि चुंबकीय मोनोपोल्स का अस्तित्व नहीं है।

    विस्तृत उत्तर

    आरेख के सहायता से व्याख्या:

    1. चुंबकीय क्षेत्र (B): रेखाओं द्वारा दर्शित, यह वह चुंबकीय क्षेत्र है जिसके माध्यम से क्षेत्रफल का तत्व (ΔΔS) रखा गया है।

    2. क्षेत्रफल का तत्व (ΔΔS): यह एक छोटी, सपाट सतह है जिसके माध्यम से चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएँ गुजर रही हैं।

    3. सामान्य वेक्टर (^n^): यह एक वेक्टर है जो क्षेत्रफल के तत्व के लंबवत है।

    4. कोण θ: यह चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्रफल के तत्व के सामान्य के बीच का कोण है।

    चुंबकत्व के लिए गौस का नियम सूत्र:

    चुंबकत्व के लिए गौस का नियम गणितीय रूप से इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: ∮⋅=0∮S​B⋅dA=0 जहाँ B चुंबकीय क्षेत्र है, dA विभेदनीय क्षेत्रफल वेक्टर है (जिसकी दिशा सतह के लंबवत होती है), और इंटीग्रल को एक बंद सतह S पर माना जाता है।

    व्युत्पत्ति और गणितीय अभिव्यक्ति:

    चुंबकत्व के लिए गौस का नियम की व्युत्पत्ति यह प्रयोगात्मक अवलोकन पर आधारित है कि चुंबकीय मोनोपोल्स का अस्तित्व नहीं है। एक सतह के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह (ΦΦB​) को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:

    Φ=∫⋅ΦB​=∫S​B⋅dA
    यहाँ, चुंबकीय प्रवाह (ΦΦB​) सतह S पर परिभाषित होता है और B चुंबकीय क्षेत्र होता है और dA वह अनंत छोटी सतह होती है जिस पर चुंबकीय क्षेत्र लागू होता है। एक बंद सतह के लिए, नियम यह निर्देशित करता है कि क्षेत्रफल में प्रवेश करने वाली और छोड़ने वाली चुंबकीय रेखाओं की संख्या समान होनी चाहिए, इसलिए कुल प्रवाह शून्य होता है।

    संख्यात्मक उदाहरण:

    मान लीजिए हम एक समान चुंबकीय क्षेत्र B में रखे गए एक फ्लैट वर्ग सतह के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह की गणना करना चाहते हैं जो सतह के सामान्य से एक कोण θ बनाता है।

    सतह का क्षेत्रफल =2A=l2 होता है, और चुंबकीय प्रवाह ΦΦB​ होगा: Φ=⋅⋅cos⁡ΦB​=B⋅A⋅cos(θ) Φ=⋅2⋅cos⁡ΦB​=B⋅l2⋅cos(θ)

    अगर =2B=2 टेस्ला, =0.1l=0.1 मीटर, और =30∘θ=30∘ हो तो: Φ=2⋅(0.1)2⋅cos⁡(30∘)ΦB​=2⋅(0.1)2⋅cos(30∘) Φ=0.02⋅3/2ΦB​=0.02⋅3​/2 Φ=0.01732ΦB​=0.01732 वेबर (Wb)

    यह उस सतह के माध्यम से चुंबकीय प्रवाह है, लेकिन याद रखें, एक बंद सतह के लिए कुल प्रवाह गौस के नियम के अनुसार शून्य होगा।

  4. 4.मैग्नेटाइज़ेशन और मैग्नेटिक इंटेंसिटी

    संक्षिप्त उत्तर मैग्नेटाइज़ेशन (Magnetization) को एक सामग्री के प्रति इकाई आयतन का मैग्नेटिक मोमेंट कहा जाता है और इसे M द्वारा दर्शाया जाता है। मैग्नेटिक इंटेंसिटी, जिसे मैग्नेटिक फील्ड इंटेंसिटी या मैग्नेटिक फील्ड स्ट्रेंथ भी कहा जाता है, H द्वारा दर्शाया जाता है। यह किसी सामग्री या स्थान में मैग्नेटिक फील्ड लाइनों की सांद्रता को दर्शाता है।

    विस्तृत उत्तर

    1. मैग्नेटाइज़ेशन (M):मैग्नेटाइज़ेशन यह मापता है कि एक सामग्री किस हद तक मैग्नेटाइज़ हो सकती है। यह एक वेक्टर मात्रा है जो एक मैग्नेटिक सामग्री में मैग्नेटिक डायपोल मोमेंट्स की घनत्व को दर्शाता है। यह एक बाहरी मैग्नेटिक फील्ड द्वारा प्रेरित होता है और फेरोमैग्नेटिक सामग्रियों में स्थायी हो सकता है।

    फॉर्मूला: =कुल मैग्नेटिक मोमेंटआयतनM=आयतनकुल मैग्नेटिक मोमेंट​

    1. मैग्नेटिक इंटेंसिटी (H):मैग्नेटिक इंटेंसिटी एक वेक्टर फील्ड है जो यह दर्शाता है कि एक मैग्नेटिक फील्ड एक फेरोमैग्नेटिक सामग्री को किस प्रकार और किस दिशा में प्रभावित करेगी। यह उस मैग्नेटाइज़िंग बल से संबंधित है जो किसी सामग्री में मैग्नेटाइज़ेशन का कारण बनता है।

    फॉर्मूला: =0−H=μ0​B​−M जहाँ B मैग्नेटिक फ्लक्स डेंसिटी है, और 0μ0​ मुक्त स्थान की पारगम्यता है।

    1. M और H के बीच संबंध:

    एक सामग्री में, मैग्नेटाइज़ेशन M लागू मैग्नेटिक इंटेंसिटी H के प्रति एक बिंदु तक आनुपातिक होता है फेरोमैग्नेटिक सामग्रियों के लिए। आनुपातिकता का स्थिरांक मैग्नेटिक ससेप्टिबिलिटी (χm​) के रूप में जाना जाता है।

    फॉर्मूला: =M=χm​H
    मैग्नेटाइज़ेशन (M) को एक सामग्री के प्रति इकाई आयतन के मैग्नेटिक मोमेंट के रूप में समझाया गया है। यह एक वेक्टर मात्रा है जो दर्शाती है कि कितना एक सामग्री एक लागू मैग्नेटिक फील्ड के जवाब में मैग्नेटाइज़ होगी। दिया गया सूत्र है:

    =नेटM=Vmनेट​​

    जहाँ नेटmनेट​ नेट मैग्नेटिक मोमेंट है और V आयतन है।

    मैग्नेटिक इंटेंसिटी (H), जिसे मैग्नेटिक फील्ड स्ट्रेंथ भी कहा जाता है, एक वेक्टर फील्ड है जिसे सूत्र द्वारा परिभाषित किया गया है:

    =0−H=μ0​B​−M

    जहाँ B मैग्नेटिक फ्लक्स घनत्व है, 0μ0​ मुक्त स्थान की पारगम्यता है, और M मैग्नेटाइज़ेशन है। H मूल रूप से दोनों मुक्त धाराओं और सामग्री के मैग्नेटाइज़ेशन द्वारा उत्पादित मैग्नेटिक फील्ड को मापता है।

    जब एक गैर-शून्य मैग्नेटाइज़ेशन वाली सामग्री को एक सोलेनॉइड के अंदर रखा जाता है, तो सोलेनॉइड के अंदर नेट मैग्नेटिक फील्ड (B) सोलेनॉइड के कारण फील्ड (0B0​) और सामग्री के मैग्नेटाइज़ेशन के कारण फील्ड (Bm​) के वेक्टर योग के रूप में व्यक्त की जाती है:

    =0+B=B0​+Bm​

    जहाँ Bm​ मैग्नेटाइज़ेशन M से संबंधित है:

    =0Bm​=μ0​M

    जहाँ सोलेनॉइड के अंदर की आंतरिक मैग्नेटिक फील्ड को सामग्री द्वारा संशोधित किया जाता है, संबंध को व्यक्त किया जा सकता है:

    =0(+)B=μ0​(H+M)

    यहाँ, 0μ0​ मुक्त स्थान की मैग्नेटिक पारगम्यता है।

    मैग्नेटिक ससेप्टिबिलिटी (χ) की अवधारणा पेश की जाती है, जो एक बाहरी फील्ड द्वारा एक सामग्री कितनी मैग्नेटाइज़ हो सकती है, इसका एक माप है। इसे दिया गया है:

    =M=χH

    अंत में, सापेक्ष पारगम्यता (μr​), जो एक आयामहीन मात्रा है, को दिया गया है:

    =1+μr​=1+χ

    और इस प्रकार, एक सामग्री में B, H, और M के बीच संबंध को सारांशित किया गया है:

    =0B=μ0​μr​H

    ये सूत्र और अवधारणाएँ सामग्री कैसे मैग्नेटिक फील्ड्स का जवाब देती हैं, इसे समझने में मौलिक हैं और इलेक्ट्रोमैग्नेटिज़्म में अनुप्रयोगों, जिसमें इलेक्ट्रिकल डिवाइसेज, मैग्नेटिक स्टोरेज मीडिया, और मेडिकल इमेजिंग सिस्टम्स का डिजाइन शामिल है, के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  5. 5.सामग्रियों के चुंबकीय गुण

    संक्षिप्त उत्तर

    सामग्रियों के चुंबकीय गुण यह वर्णन करते हैं कि सामग्रियाँ बाहरी चुंबकीय क्षेत्र का कैसे जवाब देती हैं। उनकी चुंबकीय संवेदनशीलता (c) के आधार पर, उन्हें तीन प्रकार में वर्गीकृत किया जाता है:

    1. डायामैग्नेटिक सामग्रियाँ नकारात्मक संवेदनशीलता वाली होती हैं, यानी वे चुंबकीय क्षेत्रों से विकर्षित होती हैं।
    2. पैरामैग्नेटिक सामग्रियाँ सकारात्मक लेकिन छोटी संवेदनशीलता वाली होती हैं, यानी वे चुंबकीय क्षेत्रों की ओर कमजोरी से आकर्षित होती हैं।
    3. फेरोमैग्नेटिक सामग्रियाँ बड़ी और सकारात्मक संवेदनशीलता वाली होती हैं, यानी वे चुंबकीय क्षेत्रों की ओर मजबूती से आकर्षित होती हैं और स्थायी रूप से चुंबकीय बन सकती हैं।

    ये गुण विभिन्न अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण हैं, जैसे MRI मशीनों में (डायामैग्नेटिक गुणों का उपयोग करके), हार्ड ड्राइव्स में जानकारी संग्रहीत करने में (फेरोमैग्नेटिज़्म), और सेंसर्स और एक्ट्यूएटर्स में (पैरामैग्नेटिज़्म)।

    विस्तृत उत्तर

    1. डायामैग्नेटिज़्म

    डायामैग्नेटिक सामग्रियाँ उनकी नकारात्मक चुंबकीय संवेदनशीलता द्वारा वर्णित होती हैं। इसका मतलब है कि जब एक बाहरी चुंबकीय क्षेत्र लागू किया जाता है, तो वे विपरीत दिशा में एक प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र बनाती हैं, जिससे एक विकर्षण प्रभाव होता है। यह इसलिए होता है क्योंकि सामग्री में घूमने वाले इलेक्ट्रॉन लागू क्षेत्र को रद्द करने के लिए समायोजित होते हैं।

    वास्तविक जीवन का उदाहरण: पानी और ग्रेफाइट डायामैग्नेटिक होते हैं। जब आप उन्हें एक चुंबकीय क्षेत्र में रखते हैं, तो वे चुंबकीय क्षेत्र को कमजोरी से विकर्षित करेंगे।

    गतिविधि: पानी पर एक छोटा टुकड़ा ग्रेफाइट रखें और उसके पास एक मजबूत चुंबक लाएँ। आप देखेंगे कि ग्रेफाइट चुंबक से हल्का विकर्षित होता है।

    जीवन में उपयोग: डायामैग्नेटिक सामग्रियाँ चुंबकीय लेविटेशन में उपयोग की जाती हैं, जहाँ वस्तुओं को बिना किसी समर्थन के हवा में तैरते हुए बनाया जाता है, अन्य चुंबकीय क्षेत्रों के अलावा।

    करियर या उद्योग: उन्नत सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास, विशेष रूप से चुंबकीय लेविटेशन परिवहन प्रणालियों या मेडिकल टेक्नोलॉजीज जैसे MRI मशीनों के डिजाइन में।

    2. पैरामैग्नेटिज़्म

    पैरामैग्नेटिक सामग्रियाँ चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति छोटी लेकिन सकारात्मक संवेदनशीलता रखती हैं। वे चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा आकर्षित होती हैं, लेकिन प्रभाव कमजोर होता है और केवल तब दिखाई देता है जब बाहरी क्षेत्र मजबूत होता है। यह आकर्षण सामग्री में अजोड़ी इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है जो बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के साथ संरेखित होते हैं।

    वास्तविक जीवन का उदाहरण: एल्यूमिनियम और ऑक्सीजन पैरामैग्नेटिक होते हैं। वे चुंबकीय क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं लेकिन क्षेत्र हटाने के बाद मैग्नेटाइजेशन बरकरार नहीं रखते हैं।

    गतिविधि: एक छोटी एल्यूमिनियम छड़ को एक धागे से लटकाएं और उसके पास एक मजबूत चुंबक लाएँ। आप देखेंगे कि छड़ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में स्वयं को संरेखित करती है।

    जीवन में उपयोग: पैरामैग्नेटिक सामग्रियाँ विभिन्न सेंसरों में उपयोग की जाती हैं और MRI स्कैन में छवि की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विपरीत एजेंटों के रूप में।

    करियर या उद्योग: हेल्थकेयर MRI इमेजिंग के लिए, और इंजीनियरिंग सेंसर्स और एक्ट्यूएटर्स के डिजाइनिंग के लिए।

    3. फेरोमैग्नेटिज़्म

    फेरोमैग्नेटिक सामग्रियाँ चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति बड़ी और सकारात्मक संवेदनशीलता रखती हैं। वे चुंबकीय क्षेत्रों की ओर मजबूती से आकर्षित होती हैं और बाहरी क्षेत्र हटाने के बाद भी अपने चुंबकीयकरण को बरकरार रख सकती हैं, एक गुण जिसे हिस्टेरेसिस कहा जाता है।

    वास्तविक जीवन का उदाहरण: लोहा, कोबाल्ट, और निकल फेरोमैग्नेटिक सामग्रियाँ होती हैं। वे स्थायी रूप से चुंबकीय बन सकते हैं।

    गतिविधि: एक मजबूत चुंबक से एक लोहे के टुकड़े को कई बार एक दिशा में स्ट्रोक करें। लोहे का टुकड़ा चुंबकीय हो जाता है और छोटे लोहे के फाइलिंग्स या पिनों को आकर्षित कर सकता है।

    जीवन में उपयोग: फेरोमैग्नेटिक सामग्रियाँ स्थायी चुंबक बनाने में मौलिक होती हैं, जिनका उपयोग मोटरों, इलेक्ट्रिक जनरेटरों, डेटा स्टोरेज के लिए हार्ड ड्राइव्स, और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।

    करियर या उद्योग: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, डेटा स्टोरेज, और ऊर्जा क्षेत्र उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए फेरोमैग्नेटिक सामग्रियों पर भारी निर्भर करते हैं।

कक्षा 12 भौतिक विज्ञान के अन्य अध्याय