सभी महत्वपूर्ण सूत्र — कक्षा 10 गणित नोट्स
सभी महत्वपूर्ण सूत्र · कक्षा 10 गणित · 11 टॉपिक.
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सभी महत्वपूर्ण सूत्र में शामिल टॉपिक
1.वास्तविक संख्याओं के महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 सूत्र:
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यूक्लिड का विभाजन प्रमेय:
a=bq+ra = bq + r
जहाँ:- aa = भाज्य
- bb = भाजक
- qq = भागफल
- rr = शेषफल ( 0≤r<b0 \leq r < b)
-
HCF निकालने का सूत्र (यूक्लिड का एल्गोरिथम):
दो संख्याओं aa और bb का HCF निकालने के लिए:
HCF(a,b)=HCF(b,r)\text{HCF}(a, b) = \text{HCF}(b, r) (जब तक r=0r = 0 न हो जाए)
📖 व्याख्या:-
यूक्लिड का विभाजन प्रमेय:
यह प्रमेय किसी भी धन पूर्णांक aa को bb के गुणज और एक शेषफल rr के रूप में व्यक्त करता है। शेषफल हमेशा bb से छोटा होता है। -
HCF (महत्तम समापवर्तक):
- दो संख्याओं का HCF वह सबसे बड़ी संख्या है जो दोनों संख्याओं को पूर्ण रूप से विभाजित करती है।
- यूक्लिड का एल्गोरिथम HCF निकालने का एक चरण-दर-चरण तरीका है। इसमें विभाजन प्रमेय को बार-बार लागू करते हैं जब तक शेषफल 0 न हो जाए।
🔢 उदाहरण:
56 और 12 का HCF निकालते हैं।
-
चरण 1: 56 और 12 पर यूक्लिड का विभाजन प्रमेय लगाएँ:
56=12×4+856 = 12 \times 4 + 8(यहाँ q=4q = 4 और r=8r = 8)
-
चरण 2: अब 12 और 8 पर लगाएँ:
12=8×1+412 = 8 \times 1 + 4(यहाँ q=1q = 1 और r=4r = 4)
-
चरण 3: अब 8 और 4 पर लगाएँ:
8=4×2+08 = 4 \times 2 + 0(यहाँ r=0r = 0)
अब शेषफल 0 हो गया है, इसलिए इस चरण का भाजक, 4, हमारा HCF है।
HCF = 4
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2.बहुपद के लिए महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 सूत्र:
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बहुपद का मानक रूप:
एक चर xx का बहुपद P(x)P(x) इस प्रकार लिखा जाता है:
P(x)=anxn+an−1xn−1+⋯+a1x+a0P(x) = a_n x^n + a_{n-1} x^{n-1} + \cdots + a_1 x + a_0
जहाँ:- an,an−1,…,a0a_n, a_{n-1}, \ldots, a_0 स्थिरांक (कोफ़िशिएंट्स) हैं।
- nn बहुपद की डिग्री है (सबसे बड़ा घातांक)।
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बहुपद के प्रकार:
- रेखीय बहुपद: P(x)=ax+bP(x) = ax + b (डिग्री = 1)
- द्विघात बहुपद: P(x)=ax2+bx+cP(x) = ax^2 + bx + c (डिग्री = 2)
- घनात्मक बहुपद: P(x)=ax3+bx2+cx+dP(x) = ax^3 + bx^2 + cx + d (डिग्री = 3)
-
शेषफल प्रमेय:
यदि P(x)P(x) को (x−a)(x - a) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल P(a)P(a) होगा। -
गुणनखंड प्रमेय:
यदि P(a)=0P(a) = 0, तो (x−a)(x - a) बहुपद P(x)P(x) का एक गुणनखंड है। -
द्विघात बहुपद के शून्यकों और कोफ़िशिएंट्स के बीच संबंध:
ax2+bx+cax^2 + bx + c के लिए:- शून्यकों का योग: α+β=−ba\alpha + \beta = -\frac{b}{a}
- शून्यकों का गुणनफल: αβ=ca\alpha \beta = \frac{c}{a}
🔢 उदाहरण:
P(x)=2x3−3x2+x+5P(x) = 2x^3 - 3x^2 + x + 5 को (x−2)(x - 2) से विभाजित करते समय शेषफल निकालें।
-
चरण 1: शेषफल प्रमेय के अनुसार, x=2x = 2 को P(x)P(x) में डालें:
P(2)=2(2)3−3(2)2+(2)+5
P(2) = 2(2)^3 - 3(2)^2 + (2) + 5 -
चरण 2: घात निकालें और गुणा करें:
P(2)=2×8−3×4+2+5
P(2) = 2 \times 8 - 3 \times 4 + 2 + 5 -
चरण 3: सरलीकरण करें:
P(2)=16−12+2+5P(2) = 16 - 12 + 2 + 5
P(2)=11P(2) = 11
शेषफल = 11
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3.दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म का महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 मुख्य सूत्र:
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रेखीय समीकरण का सामान्य रूप:
a1x+b1y+c1=0a_1x + b_1y + c_1 = 0 a2x+b2y+c2=0a_2x + b_2y + c_2 = 0जहाँ a1,b1,c1,a2,b2,c2a_1, b_1, c_1, a_2, b_2, c_2 वास्तविक संख्याएँ हैं, और xx और yy चर हैं।
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समीकरणों के हल का प्रकार:
- संगत प्रणाली (Consistent):
a1a2≠b1b2\frac{a_1}{a_2} \neq \frac{b_1}{b_2} → एक अद्वितीय हल - असंगत प्रणाली (Inconsistent):
a1a2=b1b2≠c1c2\frac{a_1}{a_2} = \frac{b_1}{b_2} \neq \frac{c_1}{c_2} → कोई हल नहीं - आश्रित प्रणाली (Dependent):
a1a2=b1b2=c1c2\frac{a_1}{a_2} = \frac{b_1}{b_2} = \frac{c_1}{c_2} → अनंत हल
- संगत प्रणाली (Consistent):
-
रेखीय समीकरण हल करने की विधियाँ:
- प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method)
- उन्मूलन विधि (Elimination Method)
- क्रॉस-मल्टिप्लिकेशन विधि (Cross-Multiplication Method): xb1c2−b2c1=yc1a2−c2a1=1a1b2−a2b1\frac{x}{b_1c_2 - b_2c_1} = \frac{y}{c_1a_2 - c_2a_1} = \frac{1}{a_1b_2 - a_2b_1}
🔢 उदाहरण:
इन समीकरणों को उन्मूलन विधि से हल करें:
- 2x+3y=122x + 3y = 12
- x−2y=−3x - 2y = -3
हल:
-
दूसरा समीकरण x−2y=−3x - 2y = -3 को 2 से गुणा करें:
2x−4y=−62x - 4y = -6 -
पहले समीकरण से इसे घटाएँ:
(2x+3y)−(2x−4y)=12−(−6)(2x + 3y) - (2x - 4y) = 12 - (-6) 7y=187y = 18 y=187y = \frac{18}{7} -
y=187y = \frac{18}{7} को दूसरे समीकरण में रखें:
x−2(187)=−3x - 2\left(\frac{18}{7}\right) = -3 x=157x = \frac{15}{7}
हल:
x=157,y=187
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4.द्विघात समीकरण के लिए महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 सूत्र:
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द्विघात समीकरण का सामान्य रूप:
ax2+bx+c=0ax^2 + bx + c = 0
जहाँ:- a,b,ca, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं और a≠0a \neq 0।
- xx चर है।
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द्विघात समीकरण हल करने का सूत्र:
x=−b±b2−4ac2a
x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a} -
विभेदक (Discriminant):
D=b2−4acD = b^2 - 4ac- यदि D>0D > 0: दो वास्तविक और भिन्न मूल।
- यदि D=0D = 0: एक समान (समान) वास्तविक मूल।
- यदि D<0D < 0: कोई वास्तविक मूल नहीं (काल्पनिक मूल)।
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वर्गीकरण विधि (Factorization Method):
- ऐसे दो संख्याएँ खोजें जिनका गुणनफल a×ca \times c हो और उनका योग bb के बराबर हो।
- मध्य पद को इन संख्याओं के अनुसार तोड़कर गुणनखंड करें।
📖 व्याख्या:
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द्विघात समीकरण क्या है?
द्विघात समीकरण वह समीकरण है जिसमें xx का उच्चतम घातांक 2 होता है। -
द्विघात समीकरण के मूल:
समीकरण ax2+bx+c=0ax^2 + bx + c = 0 को संतुष्ट करने वाले xx के मान को द्विघात समीकरण के मूल कहा जाता है। -
मूल निकालने के तरीके:
- वर्गीकरण विधि
- द्विघात सूत्र
- वर्ग पूरा करना
-
विभेदक:
विभेदक (DD) से मूलों की प्रकृति का पता चलता है:- DD धनात्मक: दो भिन्न वास्तविक मूल।
- DD शून्य: एक समान वास्तविक मूल।
- DD ऋणात्मक: कोई वास्तविक मूल नहीं।
🔢 उदाहरण:
द्विघात समीकरण 2x2−7x+3=02x^2 - 7x + 3 = 0 को द्विघात सूत्र से हल करें।
-
चरण 1: aa, bb, और cc ज्ञात करें:
- a=2a = 2
- b=−7b = -7
- c=3
c = 3
-
चरण 2: द्विघात सूत्र में रखें:
x=−(−7)±(−7)2−4×2×32×2
x = \frac{-(-7) \pm \sqrt{(-7)^2 - 4 \times 2 \times 3}}{2 \times 2} -
चरण 3: सरलीकरण करें:
x=7±49−244x = \frac{7 \pm \sqrt{49 - 24}}{4}
x=7±254
x = \frac{7 \pm \sqrt{25}}{4} -
चरण 4: मूल निकालें:
x=7±54
x = \frac{7 \pm 5}{4}- मूल 1: x=7+54=124=3
x = \frac{7 + 5}{4} = \frac{12}{4} = 3 - मूल 2: x=7−54=24=12x = \frac{7 - 5}{4} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2}
- मूल 1: x=7+54=124=3
हल: मूल x=3x = 3 और x=12x = \frac{1}{2} हैं।
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5.अंकगणितीय प्रगति का महत्वपूर्ण सूत्र (AP)
🧮 मुख्य सूत्र:
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अंकगणितीय प्रगति का सामान्य रूप:
अंकगणितीय प्रगति (AP) ऐसी संख्याओं की श्रेणी है जिसमें प्रत्येक पद के बीच का अंतर स्थिर होता है।
a,a+d,a+2d,a+3d,…a, a + d, a + 2d, a + 3d, \ldotsजहाँ:
- aa = पहला पद
- dd = समान अंतर (कॉमन डिफरेंस)
-
AP के nn-वें पद का सूत्र:
an=a+(n−1)da_n = a + (n-1)d
जहाँ:- ana_n = nn-वाँ पद
- aa = पहला पद
- dd = समान अंतर
- nn = पद का स्थान
-
पहले nn पदों का योग:
Sn=n2(2a+(n−1)d)S_n = \frac{n}{2} \left(2a + (n-1)d\right)
या
Sn=n2(a+l)S_n = \frac{n}{2} \left(a + l\right)
जहाँ:- SnS_n = पहले nn पदों का योग
- aa = पहला पद
- dd = समान अंतर
- ll = अंतिम पद
📖 व्याख्या:
-
अंकगणितीय प्रगति (AP) क्या है?
यह एक ऐसी श्रेणी है जिसमें प्रत्येक पद में एक निश्चित संख्या dd जोड़ी या घटाई जाती है। इसे समान अंतर कहते हैं।उदाहरण: 2,5,8,11,14,…2, 5, 8, 11, 14, \ldots
- यहाँ समान अंतर d=5−2=3d = 5 - 2 = 3 है।
- यहाँ समान अंतर d=5−2=3d = 5 - 2 = 3 है।
-
nn-वें पद का सूत्र:
इससे आप किसी भी विशेष स्थान पर मौजूद पद को ज्ञात कर सकते हैं। -
पहले nn पदों का योग:
इससे आप AP के पहले nn पदों का कुल योग ज्ञात कर सकते हैं।
🔢 उदाहरण:
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AP: 3,7,11,15,…3, 7, 11, 15, \ldots का 10वाँ पद ज्ञात करें।
चरण 1: aa और dd ज्ञात करें:
- a=3a = 3 (पहला पद)
- d=7−3=4d = 7 - 3 = 4 (समान अंतर)
चरण 2: nn-वें पद का सूत्र लगाएँ:
an=a+(n−1)da_n = a + (n-1)dn=10n = 10 रखने पर:
a10=3+(10−1)×4a_{10} = 3 + (10-1) \times 4
a10=3+36a_{10} = 3 + 36
a10=39a_{10} = 39उत्तर: 10वाँ पद = 39
-
इसी AP के पहले 10 पदों का योग ज्ञात करें।
चरण 1: योग का सूत्र लगाएँ:
Sn=n2(2a+(n−1)d)S_n = \frac{n}{2} \left(2a + (n-1)d\right)n=10n = 10, a=3a = 3, d=4d = 4:
S10=102(2×3+9×4)S_{10} = \frac{10}{2} \left(2 \times 3 + 9 \times 4\right)
S10=5(6+36)S_{10} = 5 \left(6 + 36\right)
S10=5×42S_{10} = 5 \times 42
S10=210S_{10} = 210उत्तर: पहले 10 पदों का योग = 210
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6.त्रिभुजों का महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 मुख्य सूत्र और सिद्धांत:
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समान त्रिभुज (Similar Triangles):
दो त्रिभुज समान होते हैं यदि:- उनके संबंधित कोण बराबर होते हैं।
- उनके संबंधित भुजाओं का अनुपात समान होता है।
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समानता की कसौटी:
- AA (कोण-कोण) कसौटी: यदि दो त्रिभुजों के दो कोण बराबर हों, तो वे समान होते हैं।
- SSS (भुजा-भुजा-भुजा) कसौटी: यदि दो त्रिभुजों की सभी संबंधित भुजाओं का अनुपात समान हो, तो वे समान होते हैं।
- SAS (भुजा-कोण-भुजा) कसौटी: यदि दो त्रिभुजों के एक कोण के दोनों ओर की भुजाओं का अनुपात समान हो, तो वे समान होते हैं।
-
मूलभूत समानुपात प्रमेय (थेल्स का प्रमेय):
यदि एक त्रिभुज में किसी भुजा के समांतर एक रेखा खींची जाए, तो यह अन्य दो भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करती है।△ABC\triangle ABC में, यदि DE∥BCDE \parallel BC, तो:
ADDB=AEEC
\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC} -
पाइथागोरस प्रमेय:
एक समकोण त्रिभुज में, कर्ण का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है।△ABC\triangle ABC में यदि ∠B=90∘\angle B = 90^\circ:
AC2=AB2+BC2AC^2 = AB^2 + BC^2 -
समान त्रिभुजों के क्षेत्रफल का अनुपात:
यदि △ABC∼△DEF\triangle ABC \sim \triangle DEF, तो:
क्षेत्रफल △ABCक्षेत्रफल △DEF=(ABDE)2\frac{\text{क्षेत्रफल } \triangle ABC}{\text{क्षेत्रफल } \triangle DEF} = \left(\frac{AB}{DE}\right)^2
🔢 उदाहरण:
उदाहरण 1:
△ABC\triangle ABC में DE∥BCDE \parallel BC, AD=4 cmAD = 4 \, \text{cm}, DB=6 cmDB = 6 \, \text{cm}, AE=5 cmAE = 5 \, \text{cm}। ECEC ज्ञात करें।हल:
मूलभूत समानुपात प्रमेय के अनुसार:ADDB=AEEC\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}
मान रखकर हल करें:
46=5EC\frac{4}{6} = \frac{5}{EC}
क्रॉस-मल्टिप्लाई करें:
4×EC=6×5
4 \times EC = 6 \times 5 4×EC=30
4 \times EC = 30 EC=304=7.5 cmEC = \frac{30}{4} = 7.5 \, \text{cm}उत्तर: EC=7.5 cm
-
7.ट्रिग्नोमेट्री के लिए प्रभावशाली सूत्र
🧮 मुख्य सूत्र और अवधारणाएँ:
-
त्रिकोणमितीय अनुपात:
समकोण त्रिभुज में कोण θ\theta के लिए निम्नलिखित त्रिकोणमितीय अनुपात होते हैं:-
साइन (sinθ\sin\theta):
sinθ=लंबकर्ण\sin\theta = \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}
(यह कोण θ\theta के सामने वाली भुजा और कर्ण का अनुपात है।) -
कोसाइन (cosθ\cos\theta):
cosθ=आधारकर्ण\cos\theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}
(यह कोण θ\theta के पास वाली भुजा और कर्ण का अनुपात है।) -
टेंजेंट (tanθ\tan\theta):
tanθ=लंबआधार\tan\theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}
(यह लंब और आधार का अनुपात है।) -
कोसेकेंट (cscθ\csc\theta):
cscθ=1sinθ=कर्णलंब\csc\theta = \frac{1}{\sin\theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}}
(यह sinθ\sin\theta का व्युत्क्रम है।) -
सेकेंट (secθ\sec\theta):
secθ=1cosθ=कर्णआधार\sec\theta = \frac{1}{\cos\theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}}
(यह cosθ\cos\theta का व्युत्क्रम है।) -
कोटेंजेंट (cotθ\cot\theta):
cotθ=1tanθ=आधारलंब\cot\theta = \frac{1}{\tan\theta} = \frac{\text{आधार}}{\text{लंब}}
(यह tanθ\tan\theta का व्युत्क्रम है।)
-
📖 त्रिकोणमितीय अनुपातों की सारणी:
📖 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ (Identities):
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पाइथागोरस सर्वसमिका:
sin2θ+cos2θ=1
\sin^2\theta + \cos^2\theta = 1 -
टेंजेंट और सेकेंट का संबंध:
1+tan2θ=sec2θ
1 + \tan^2\theta = \sec^2\theta -
कोटेंजेंट और कोसेकेंट का संबंध:
1+cot2θ=csc2θ1 + \cot^2\theta = \csc^2\theta
🔢 उदाहरण:
उदाहरण 1:
यदि sinθ=35\sin\theta = \frac{3}{5}, तो cosθ\cos\theta और tanθ\tan\theta ज्ञात करें।-
चरण 1:
दिया गया है sinθ=35\sin\theta = \frac{3}{5}- लंब = 3
- कर्ण = 5
-
चरण 2:
पाइथागोरस प्रमेय से आधार ज्ञात करें:
कर्ण2=लंब2+आधार2\text{कर्ण}^2 = \text{लंब}^2 + \text{आधार}^2
52=32+आधार25^2 = 3^2 + \text{आधार}^2
25=9+आधार225 = 9 + \text{आधार}^2
आधार2=16\text{आधार}^2 = 16
आधार=4
\text{आधार} = 4 -
चरण 3:
- cosθ=आधारकर्ण=45\cos\theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}} = \frac{4}{5}
- tanθ=लंबआधार=34\tan\theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}} = \frac{3}{4}
उत्तर:
- cosθ=45
\cos\theta = \frac{4}{5} - tanθ=34\tan\theta = \frac{3}{4}
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8.वृत्तों का महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 मुख्य अवधारणाएँ और प्रमेय
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वृत्त की परिभाषा:
एक वृत्त उन बिंदुओं का समूह है जो एक निश्चित बिंदु से समान दूरी पर होते हैं। इस निश्चित बिंदु को केंद्र कहते हैं, और इस दूरी को त्रिज्या कहते हैं। -
महत्वपूर्ण शब्द:
- त्रिज्या (Radius): केंद्र से वृत्त की परिधि तक की दूरी।
- व्यास (Diameter): केंद्र से होकर जाने वाली सबसे लंबी जीवा। व्यास=2×त्रिज्या\text{व्यास} = 2 \times \text{त्रिज्या}
- जीवा (Chord): वृत्त पर स्थित दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड।
- चाप (Arc): वृत्त की परिधि का कोई भाग।
- खंड (Sector): दो त्रिज्याओं और उनके बीच के चाप से घिरा क्षेत्र।
- स्पर्श रेखा (Tangent): वह रेखा जो वृत्त को केवल एक बिंदु पर स्पर्श करती है।
- छेदक (Secant): वह रेखा जो वृत्त को दो बिंदुओं पर काटती है।
-
वृत्त की स्पर्श रेखा:
- स्पर्श रेखा वह रेखा है जो वृत्त को केवल एक बिंदु पर छूती है।
- जिस बिंदु पर स्पर्श रेखा वृत्त को छूती है उसे स्पर्श बिंदु कहते हैं।
-
प्रमेय 1:
वृत्त की स्पर्श रेखा स्पर्श बिंदु पर त्रिज्या के लंबवत होती है।△OPA\triangle OPA में, यदि OPOP त्रिज्या है और APAP स्पर्श रेखा है, तो:
OP⊥AP
OP \perp AP -
प्रमेय 2:
किसी बाहरी बिंदु से खींची गई दो स्पर्श रेखाएँ बराबर लंबाई की होती हैं।यदि PAPA और PBPB स्पर्श रेखाएँ हैं, तो:
PA=PBPA = PB
🔢 उदाहरण
समस्या:
एक वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है। केंद्र OO से 13 सेमी दूर स्थित एक बिंदु PP से, वृत्त पर दो स्पर्श रेखाएँ PAPA और PBPB खींची गई हैं। प्रत्येक स्पर्श रेखा की लंबाई ज्ञात करें।-
दिया गया:
- त्रिज्या r=5r = 5 सेमी
- दूरी OP=13OP = 13 सेमी
-
चरण 1: पाइथागोरस प्रमेय लगाएँ:
△OPA\triangle OPA में:- OPOP कर्ण = 13 सेमी
- OAOA त्रिज्या = 5 सेमी
- PAPA स्पर्श रेखा (ज्ञात करना है)
OP2=OA2+PA2OP^2 = OA^2 + PA^2
132=52+PA213^2 = 5^2 + PA^2
169=25+PA2169 = 25 + PA^2
PA2=144PA^2 = 144
PA=144=12 सेमीPA = \sqrt{144} = 12 \, \text{सेमी}
उत्तर: प्रत्येक स्पर्श रेखा की लंबाई 12 सेमी है।
-
9.सतही क्षेत्रफल और आयतन का महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 मुख्य सूत्र
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घन (Cube) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
पृष्ठ क्षेत्रफल:
पृष्ठ क्षेत्रफल=6a2\text{पृष्ठ क्षेत्रफल} = 6a^2
जहाँ aa = घन की भुजा -
आयतन:
आयतन=a3\text{आयतन} = a^3
-
-
घनाभ (Cuboid) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
पृष्ठ क्षेत्रफल:
पृष्ठ क्षेत्रफल=2(lb+bh+hl)\text{पृष्ठ क्षेत्रफल} = 2 (lb + bh + hl)
जहाँ ll = लंबाई, bb = चौड़ाई, hh = ऊँचाई -
आयतन:
आयतन=l×b×h
\text{आयतन} = l \times b \times h
-
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सिलेंडर (Cylinder) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल (CSA):
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल=2πrh\text{वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल} = 2\pi rh
जहाँ rr = त्रिज्या, hh = ऊँचाई -
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल (TSA):
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल=2πr(r+h)\text{सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल} = 2\pi r (r + h) -
आयतन:
आयतन=πr2h
\text{आयतन} = \pi r^2 h
-
-
शंकु (Cone) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल (CSA):
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल=πrl\text{वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल} = \pi rl
जहाँ rr = त्रिज्या, ll = तिर्यक ऊँचाई (l=r2+h2l = \sqrt{r^2 + h^2}) -
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल (TSA):
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल=πr(r+l)\text{सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल} = \pi r (r + l) -
आयतन:
आयतन=13πr2h
\text{आयतन} = \frac{1}{3} \pi r^2 h
-
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गोलक (Sphere) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
पृष्ठ क्षेत्रफल:
पृष्ठ क्षेत्रफल=4πr2\text{पृष्ठ क्षेत्रफल} = 4\pi r^2 -
आयतन:
आयतन=43πr3\text{आयतन} = \frac{4}{3} \pi r^3
-
-
अर्धगोल (Hemisphere) का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन:
-
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल (CSA):
वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल=2πr2\text{वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल} = 2\pi r^2 -
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल (TSA):
सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल=3πr2\text{सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल} = 3\pi r^2 -
आयतन:
आयतन=23πr3\text{आयतन} = \frac{2}{3} \pi r^3
-
📖 व्याख्या
-
घन (Cube):
- घन के 6 समान वर्गाकार फलक होते हैं।
- उदाहरण: पासे (डाइस), आइस क्यूब, और चीनी की डली।
-
घनाभ (Cuboid):
- घनाभ के 6 आयताकार फलक होते हैं।
- उदाहरण: ईंट, माचिस की डिबिया, और जूते का डिब्बा।
-
सिलेंडर (Cylinder):
- सिलेंडर के दो वृत्तीय आधार और एक वक्र पृष्ठ होता है।
- उदाहरण: पानी के पाइप, टिन के डिब्बे, और मोमबत्ती।
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शंकु (Cone):
- शंकु का एक वृत्तीय आधार और एक वक्र पृष्ठ होता है जो एक बिंदु (शीर्ष) पर मिलता है।
- उदाहरण: आइसक्रीम कोन, पार्टी की टोपी, और ट्रैफिक कोन।
-
गोलक (Sphere):
- गोलक का सतह पूरी तरह से गोल होता है, जिसमें कोई किनारा नहीं होता।
- उदाहरण: गेंद, कंचे, और ग्रह।
-
अर्धगोल (Hemisphere):
- अर्धगोल, गोलक का आधा भाग होता है।
- उदाहरण: कटोरा और गुम्बद।
🔢 उदाहरण
उदाहरण 1:
7 सेमी त्रिज्या और 10 सेमी ऊँचाई वाले सिलेंडर का पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन ज्ञात करें।-
दिया गया:
- त्रिज्या r=7r = 7 सेमी
- ऊँचाई h=10h = 10 सेमी
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पृष्ठ क्षेत्रफल (TSA):
TSA=2πr(r+h)\text{TSA} = 2\pi r (r + h)
=2×3.14×7×(7+10)= 2 \times 3.14 \times 7 \times (7 + 10)
=2×3.14×7×17= 2 \times 3.14 \times 7 \times 17
=747.46 सेमी2= 747.46 \, \text{सेमी}^2 -
आयतन:
आयतन=πr2h\text{आयतन} = \pi r^2 h
=3.14×72×10= 3.14 \times 7^2 \times 10
=3.14×49×10= 3.14 \times 49 \times 10
=1538.6 सेमी3= 1538.6 \, \text{सेमी}^3
उत्तर:
- पृष्ठ क्षेत्रफल = 747.46 सेमी2747.46 \, \text{सेमी}^2
- आयतन = 1538.6 सेमी31538.6 \, \text{सेमी}^3
-
10.सांख्यिकी का महत्वपूर्ण सूत्र
🧮 मुख्य अवधारणाएँ और सूत्र
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औसत (Mean):
औसत किसी अवलोकनों के समूह का योग को अवलोकनों की संख्या से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
सूत्र:
औसत=अवलोकनों का योगअवलोकनों की संख्या
\text{औसत} = \frac{\text{अवलोकनों का योग}}{\text{अवलोकनों की संख्या}}यदि आंकड़े आवृत्ति तालिका में हों:
औसत=∑fixi∑fi\text{औसत} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i}
जहाँ:- fif_i = ii-वें अवलोकन की आवृत्ति
- xix_i = ii-वें अवलोकन का मान
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माध्यिका (Median):
माध्यिका वह मध्य मान है जो अवलोकनों को क्रमबद्ध करने पर बीच में आता है।- यदि अवलोकनों की संख्या nn विषम हो:
माध्यिका=(n+12)-वें अवलोकन का मान\text{माध्यिका} = \text{(}\frac{n + 1}{2}\text{)-वें अवलोकन का मान} - यदि nn सम हो:
माध्यिका=(n2-वें अवलोकन का मान) + (n2+1-वें अवलोकन का मान)2
\text{माध्यिका} = \frac{\text{(\(\frac{n}{2}\)-वें अवलोकन का मान) + (\(\frac{n}{2} + 1\)-वें अवलोकन का मान)}}{2}
- यदि अवलोकनों की संख्या nn विषम हो:
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बहुलक (Mode):
बहुलक वह मान है जो सबसे अधिक बार आता है। -
समूहित आंकड़ों के लिए सूत्र:
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समूहित आंकड़ों का औसत:
औसत=∑fixi∑fi\text{औसत} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i} -
समूहित आंकड़ों की माध्यिका:
माध्यिका=l+(n2−Ff)×h\text{माध्यिका} = l + \left(\frac{\frac{n}{2} - F}{f}\right) \times h
जहाँ:- ll = माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा
- nn = कुल आवृत्ति
- FF = माध्यिका वर्ग से पहले की संचयी आवृत्ति
- ff = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति
- hh = वर्ग की चौड़ाई
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समूहित आंकड़ों का बहुलक:
बहुलक=l+(f1−f02f1−f0−f2)×h\text{बहुलक} = l + \left(\frac{f_1 - f_0}{2f_1 - f_0 - f_2}\right) \times h
जहाँ:- ll = बहुलक वर्ग की निम्न सीमा
- f1f_1 = बहुलक वर्ग की आवृत्ति
- f0f_0 = बहुलक वर्ग से पहले वाले वर्ग की आवृत्ति
- f2f_2 = बहुलक वर्ग के बाद वाले वर्ग की आवृत्ति
- hh = वर्ग की चौड़ाई
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🔢 उदाहरण
उदाहरण: निम्नलिखित आंकड़ों के लिए औसत ज्ञात करें:
- चरण 2: fif_i और fixif_i x_i का योग:
- ∑fi=3+5+7+2+3=20\sum f_i = 3 + 5 + 7 + 2 + 3 = 20
- ∑fixi=6+20+42+16+30=114
- चरण 3: औसत:
औसत=∑fixi∑fi=11420=5.7\text{औसत} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i} = \frac{114}{20} = 5.7
उत्तर: औसत = 5.7
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11.संभाव्यता का प्रभावशाली सूत्र
🧮 मुख्य अवधारणाएँ और सूत्र
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प्रायिकता की परिभाषा:
प्रायिकता किसी घटना के होने की संभावना को मापने का तरीका है। यह 0 (असंभव घटना) से 1 (निश्चित घटना) के बीच होती है।प्रायिकता का सूत्र:
P(E)=अनुकूल परिणामों की संख्यासंभव परिणामों की कुल संख्याP(E) = \frac{\text{अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{संभव परिणामों की कुल संख्या}}जहाँ:
- P(E)P(E) = घटना EE की प्रायिकता
- अनुकूल परिणाम = वे परिणाम जो घटना EE को संतुष्ट करते हैं
- कुल परिणाम = प्रयोग में सभी संभावित परिणाम
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घटनाओं के प्रकार:
- निश्चित घटना (Certain Event): जो घटना निश्चित रूप से होती है। प्रायिकता = 1
- असंभव घटना (Impossible Event): जो घटना कभी नहीं होती। प्रायिकता = 0
- समान संभावना वाली घटनाएँ (Equally Likely Events): जिनके होने की संभावना समान होती है।
- पूरक घटनाएँ (Complementary Events): किसी घटना EE के होने और न होने की प्रायिकता का योग 1 होता है।
P(E)+P(Not E)=1
P(E) + P(\text{Not } E) = 1
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प्रायोगिक प्रायिकता (Empirical Probability):
यह वास्तविक प्रयोगों या अवलोकनों पर आधारित होती है।
P(E)=घटना E के घटित होने की संख्याकुल परीक्षणों की संख्याP(E) = \frac{\text{घटना } E \text{ के घटित होने की संख्या}}{\text{कुल परीक्षणों की संख्या}}
📖 व्याख्या
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प्रायिकता क्या है?
प्रायिकता से हमें पता चलता है कि कोई घटना होने की कितनी संभावना है। इसका उपयोग खेलों, मौसम भविष्यवाणी, खेलों और निर्णय लेने में किया जाता है। -
प्रायिकता का उदाहरण:
- यदि एक सिक्का उछाला जाए, तो संभावित परिणाम हैं हेड (H) और टेल (T)।
- हेड आने की प्रायिकता:
P(हेड)=12
P(\text{हेड}) = \frac{1}{2}
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पूरक घटनाएँ:
- यदि कल बारिश होने की प्रायिकता 0.70.7 है, तो बारिश न होने की प्रायिकता होगी:
P(बारिश न होना)=1−0.7=0.3P(\text{बारिश न होना}) = 1 - 0.7 = 0.3
- यदि कल बारिश होने की प्रायिकता 0.70.7 है, तो बारिश न होने की प्रायिकता होगी:
🔢 उदाहरण
उदाहरण:
एक थैले में 4 लाल गेंदें, 5 नीली गेंदें और 6 हरी गेंदें हैं। यदि यादृच्छिक रूप से एक गेंद निकाली जाती है, तो निम्न की प्रायिकता ज्ञात करें:-
लाल गेंद
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नीली गेंद
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चरण 1: कुल गेंदों की संख्या:
4+5+6=15
4 + 5 + 6 = 15 -
चरण 2: लाल गेंद की प्रायिकता:
P(लाल गेंद)=लाल गेंदों की संख्याकुल गेंदों की संख्या=415
P(\text{लाल गेंद}) = \frac{\text{लाल गेंदों की संख्या}}{\text{कुल गेंदों की संख्या}} = \frac{4}{15} -
चरण 3: नीली गेंद की प्रायिकता:
P(नीली गेंद)=नीली गेंदों की संख्याकुल गेंदों की संख्या=515=13P(\text{नीली गेंद}) = \frac{\text{नीली गेंदों की संख्या}}{\text{कुल गेंदों की संख्या}} = \frac{5}{15} = \frac{1}{3}
उत्तर:
- लाल गेंद की प्रायिकता = 415
\frac{4}{15} - नीली गेंद की प्रायिकता = 13\frac{1}{3}
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